Inking Corals




छुपके घूंघट से दिखी मेरी होठों कि हंसी तुमको,
जरा भि उठाती नजर तो मेरे आँशु दिख गए होते!


ना मिलाते तुम जो मुझे अपना कह के अपनों से, 
तो कबके तेरी महफ़िल से बन के बेगाने चले गए होते!


ना भटके हम फकीरों से, ना गिरो ने उछाले पत्थर, 
वरना हुम भि ज़माने में दीवाने कहे गए होते!

तड़प तेरी जुदाई कि अगर मेरे चेहरे पे झलक जाती,
तो हम भि चंद किताबो कि कहानी बन गए होते!

जो खबर होती यही महफूज़ है हाथो कि लकीरों में, 
तो क़त्ल कर के हम अपना कबके दोजख चले गए होते!!