Mere Hisaaab Se

जीने भी नहीं देते अपने हिसाब से!
पीने भी नहीं देते अपने हिसाब से!
मै लड़खड़ा कर चलू तो आकार थाम लेते है....
कमबख्त गिरने-संभलने भी नहीं देते अपने हिसाब से!
लेकर आये है सब शोले, माटी और पानी मेरे जनाजे में...
बे-मुरीद मरने भी नहीं देते अपने ईमान से!!
                                      
                                     :-जीतेन्द्र वर्मा

Inking Corals




छुपके घूंघट से दिखी मेरी होठों कि हंसी तुमको,
जरा भि उठाती नजर तो मेरे आँशु दिख गए होते!


ना मिलाते तुम जो मुझे अपना कह के अपनों से, 
तो कबके तेरी महफ़िल से बन के बेगाने चले गए होते!


ना भटके हम फकीरों से, ना गिरो ने उछाले पत्थर, 
वरना हुम भि ज़माने में दीवाने कहे गए होते!

तड़प तेरी जुदाई कि अगर मेरे चेहरे पे झलक जाती,
तो हम भि चंद किताबो कि कहानी बन गए होते!

जो खबर होती यही महफूज़ है हाथो कि लकीरों में, 
तो क़त्ल कर के हम अपना कबके दोजख चले गए होते!!

Kahe kya abroo insaano ki kya hoti hai

यु  अर्ज़  कर  फ़र्ज़  के  कर  गुजरी  बाया  करते  है! 
हमें  भि  आपसी  कई  बे  फिकरी  दिया  करते  है! 
ज़माने  भर  के  लोगो  यही  तोहमत  मलि  मुह  पे,
हर  एक  सांस  को  मेरी  आखरी  कहा  करते  है!