जीने भी नहीं देते अपने हिसाब से!
पीने भी नहीं देते अपने हिसाब से!
मै लड़खड़ा कर चलू तो आकार थाम लेते है....
कमबख्त गिरने-संभलने भी नहीं देते अपने हिसाब से!
लेकर आये है सब शोले, माटी और पानी मेरे जनाजे में...
बे-मुरीद मरने भी नहीं देते अपने ईमान से!!
:-जीतेन्द्र वर्मा
